साल 1996 का 13 मार्च,बहुत दुर्भाग्यपूर्ण था.तब मैं महज २५ साल का था.भारत और श्रीलंका के बीच विश्वकप का सेमीफाइनल होना था और मैंने जैसे-तैसे एक टिकट का जुगाड़ किया था.
मेरे हिसाब से 2011 के विश्व कप जीतने की दिशा में यात्रा की शुरुआत 2007 में उसी समय हो गई थी, जब बांग्लादेश से हार कर भारत विश्वकप से बाहर हो गया था.
महात्मा गांधी आज भी प्रासंगिक हैं? इस विषय पर अक्सर चर्चा होती रहती है. आश्चर्य इस बात का है कि गांधीजी के जमाने में भी लोग कल्पना किया करते थे कि आने वाले वक्तमें उनकी क्या मान्यता होगी, कितनी प्रासंगिकता होगी.
देश भर में किसानों की जमीन हड़पने की साजिश चल रही है. पूंजीपति और सत्ता में बैठे लोग आपस में मिलकर इस साजिश को अंजाम दे रहे हैं. जिस जमीन पर किसान की पीढिय़ों का भविष्य टिका हुआ है, उसकी कीमत औने-पौने लगाई जाती है. यहां मैं एक उदाहरण से अपनी बात शुरू करना चाहता हूं.
मेरे बाप-दादे तो पूरे मुल्क पर राज करते थे, क्या इसके बदले मुझे कुछ नहीं मिलना चाहिए?
बिहार के चुनाव परिणामों से उत्साहित कुछ सांसद मिठाइयां बांटकर अपनी खुशियों का इजहार करने के साथ अपने सहयोगी दल की तुलना में अपने ही वोटों और सीटों में असाधारण वृद्धि का दावा कर रहे थे.