आमुख कथा

पूरा है विश्वास, हम होंगे कामयाब...
विरोध जताने के लिए सैकड़ों मील का सफर तय कर लोग भले ही जंतर-मंतर आ जाते हों, लेकि नवहां से महज चंद कदमों की दूरी पर स्थित लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर यानी संसद तक उनकी आवाज नहीं पहुंच पाती. फोटोग्राफर मुकुंद डे के साथ अनिल पांडेय का खोजपरक विश्लेषण...
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मंथन
जनसांख्यिकीय आपदा
इसमें कोई शक नहीं कि जहां तक जनांकिकीय का सवाल है भारत अजेय और लाभप्रद स्थिति में है. यहां तक कि चीन जिसकी आबादी संसार में सबसे ज्यादा है, उसकी तुलना में भी भारत खास तौर पर 8 से 24 वर्ष की आयु वर्ग के लोगों के जनसांख्यकीय अनुपात के संबंध में बेहतर स्थिति में है. यह तथ्य इस बात का संकेत है कि, भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से जवान हो रही है और विश्व अर्थव्यवस्था बूढी, जाहिर है यह आपूर्ति और बाजार की मांग के पक्ष को मजबूत बनाता है ...
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प्रिय संपादक
सबकुछ संभव है
अभी तक की सबसे बड़ी खबर 'अमरत्व की ओरÓ पढ़कर सचमुच डर लगने लगा है. जन्म और मृत्यु जीवन का सत्य है, बिना मौत जीवन भी नीरस है. हमेशा के लिए जीवित रहने की वांछनीयता किस दिन जीवन को उबाऊ बना देगी, यह कहना मुश्किल है. जीवन-मरण का सह-अस्तित्व मनुष्य जीवन का यथार्थ है. जहां खुशियां और गम, कष्टï और आराम, हंसना और रोना, पाना और खोना साथ-साथ हैं वहीं जिंदगी चलती है. चलते रहने का नाम ही जीवन है. इसलिए अमरत्व की कल्पना खालिस ख्याली है. वैसे तो आज के वैज्ञानिक युग में कुछ भी असंभव नहीं है...
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