अंक -20 / 09 / 2009

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E-Magazine

  द लास्ट पंच

cartoon of the week


  संपादकीय

Professor Arindam Chaudhuri, Renowned Management Guru & Economist, Dean - IIPM

अगर राहुल गांधी सफलतापूर्वक साफ सुथरी छवि वाले युवाओं और दूरदर्शी नेताओं के मुख्यधारा की राजनीति में आने का मार्ग प्रशस्त करते हैं तो यह राष्ट्र के प्रति उनका सबसे बड़ा योगदान होगा..
पहले अतीत पर एक नजर. वर्ष 2009 के आम चुनाव के परिणाम ने यह साबित कर दिया कि गांधी परिवार की विरासत और कांग्रेस पार्टी के प्रति इनके गहरे जुड़ाव को बस संयोग नहीं कहा जा सकता. बड़ी संख्या में जीती गई सीटों, जिसके बूते यूपीए की सत्ता में धमाकेदार वापसी हुई, ने राजनीति के कई पंडितों को झूठा साबित कर दिया. बावजूद इसके यह हकीकत है कि यूपीए को जिस वजह से शानदार जीत मिली, उसके गहन विश्लेषण से यह संकेत मिलता है कि संभवत: यूपीए भी यह उम्मीद नहीं कर रही थी कि उसके पक्ष में ऐसा जनादेश आएगा. ... आगे>>>


  विशेष कालम
Column news
प्रशांतो बॅनर्जी
चमत्कारी मठ आगे>>>
Column news
गुलजारी लाल अग्रवाल
स्वार्थी लोगों को भाजपा से बाहर करना होगा  आगे>>>
Column news
थॉमस फ्रीडमैन
समय है जंगल में भ्रमण के लिए जाने का आगे>>>



  आमुख कथा

Cover Story
'कीचड़' से निकले कमल

क्या भारतीय जनता पार्टी बिखराव के कगार पर है? या बदलाव के दौर में? अटल-आडवाणी के बाद कौन देगा भाजपा को राष्ट्रव्यापी नेतृत्व? क्या पार्टी को मिलेगा कोई ऐसा नेता, जो व्यक्तिगत अहं से ऊपर उठकर सबको साथ लेकर चले? और आखिर में, मगर सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह कि क्या सिर्फ चेहरा बदलेगा या चाल और चरित्र भी? इन्हीं सवालों का जवाब तलाशने की कोशिश की ओंकारेश्वर पांडेय और अनिल पांडेय ने............


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  मंथन

Dear Editor पत्थर के सनम

पिछले कुछ सालों से पूरा देश नेताओं की एक नई कारगुजारी का गवाह बन रहा है. नेता अपनी अमरता के लिए अपनी ही मूर्तियां बनवाने की जी-जान से कोशिश कर रहे हैं. नागरिक समाज होने के नाते नेताओं के प्रति कृतज्ञता जताने के लिए उनकी मूर्तियों का निर्माण तो स्वीकार्य था, लेकिन अब तो नेता शर्म लिहाज छोड़कर अपनी ही मूर्तियां बनवा रहे हैं. इस दौड़ सबसे आगे हैं उत्तर प्रदेश की मौजूदा मुख्यमंत्री सुश्री मायावती.... आगे>>>

  प्रिय संपादक

Dear Editor पत्रिका में सचित्र विश्लेषण है

द संडे इंडियन एक शानदार पत्रिका है जिसमें संपादकीय के साथ-साथ अन्य लेख, आलोचनाएं, व्यंग्यात्मक टिप्पणियां एवं सामयिक विषयों के प्रमुख समाचारों का सटीक विश्लेषण पढऩे को मिला. संपादकीय में बजट की बारीकियों का सही चित्रण है. जो तारीफ के लायक है, उसकी तारीफ की गई है और जो कमियां हैं, उसको इंगित कर आगे के लिए सही मशविरा दिया गया है. सभी प्रमुख समाचारों का पत्रिका में सचित्र विश्लेषण है.... आगे>>>