आमुख कथा

'कीचड़' से निकले कमल
क्या भारतीय जनता पार्टी बिखराव के कगार पर है? या बदलाव के दौर में? अटल-आडवाणी के बाद कौन देगा भाजपा को राष्ट्रव्यापी नेतृत्व? क्या पार्टी को मिलेगा कोई ऐसा नेता, जो व्यक्तिगत अहं से ऊपर उठकर सबको साथ लेकर चले? और आखिर में, मगर सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह कि क्या सिर्फ चेहरा बदलेगा या चाल और चरित्र भी? इन्हीं सवालों का जवाब तलाशने की कोशिश की ओंकारेश्वर पांडेय और अनिल पांडेय ने............
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मंथन
पत्थर के सनम
पिछले कुछ सालों से पूरा देश नेताओं की एक नई कारगुजारी का गवाह बन रहा है. नेता अपनी अमरता के लिए अपनी ही मूर्तियां बनवाने की जी-जान से कोशिश कर रहे हैं. नागरिक समाज होने के नाते नेताओं के प्रति कृतज्ञता जताने के लिए उनकी मूर्तियों का निर्माण तो स्वीकार्य था, लेकिन अब तो नेता शर्म लिहाज छोड़कर अपनी ही मूर्तियां बनवा रहे हैं. इस दौड़ सबसे आगे हैं उत्तर प्रदेश की मौजूदा मुख्यमंत्री सुश्री मायावती....
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प्रिय संपादक
पत्रिका में सचित्र विश्लेषण है
द संडे इंडियन एक शानदार पत्रिका है जिसमें संपादकीय के साथ-साथ अन्य लेख, आलोचनाएं, व्यंग्यात्मक टिप्पणियां एवं सामयिक विषयों के प्रमुख समाचारों का सटीक विश्लेषण पढऩे को मिला. संपादकीय में बजट की बारीकियों का सही चित्रण है. जो तारीफ के लायक है, उसकी तारीफ की गई है और जो कमियां हैं, उसको इंगित कर आगे के लिए सही मशविरा दिया गया है. सभी प्रमुख समाचारों का पत्रिका में सचित्र विश्लेषण है....
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