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शनिवार, नवंबर 22, 2014
 
 

कॉल गर्ल नहीं, चाहिए कॉलेज गर्ल

 

अभिषेक कुमार, विकास चौधरी | जुलाई 22, 2011 14:25
 

कॉल गर्ल... दो दशक पहले यह शब्द उत्तेजना जगा देता था. इस शब्द का मतलब था परंपरागत धंधेवालियों से अलग, देह-व्यापार करने वाली, चमक-दमक वाली आधुनिक युवती, जो आपके बुलाने पर उपलब्ध हो, देह-भोग के शौकीनों में यह अभिजात्यता की नई पहचान थी. अब रेड लाइट एरिया में जाने का खतरा और जहमत कौन उठाएं. मुटियाती, उम्रदराज और अशिक्षित, फूहड़ धंधेवालियों के साथ सेक्स सिर्फ गरीबों के लिए है. अगर जेब मोटी है तो यौन-क्रीड़ा में कुशल स्मार्ट कॉल गर्ल बुलाइए. पर प्रगति की तेज रफ्तारी देखिए. उसने कॉल गर्ल की चमक उसी तरह मंद कर दी जैसे अधेड़ कोठेवालियों का धंधा मंदा पड़ जाता है. अब नया चलन है कॉलेज गर्ल...स्वीट एंड सेक्सी कॉलेज गर्ल.

 दुनिया का यह सबसे पुराना कारोबार अब नया रूप धारण कर चुका है. धंधेवालियों को अब एस्कॉर्ट, सेक्स वर्कर जैसे नाम से जाना जाता है.  इनका ठिकाना देहमंडी तक सीमित नहीं रहा, इन्हें शहर के किसी भी हिस्से में तलाशा जा सकता है. होटल, मोटेल, मॉल, मेट्रो स्टेशन, मसाज पार्लर, बस स्टॉप, सब-वे, हाइवे ये हर कहीं मौजूद हैं. और तो और, इन्हें तलाशने के लिए कहीं बाहर जाने की भी क्या जरूरत. अब इनके ठिकाने साइबर संसार में भी हैं. मोबाइल और इंटरनेट पर, बस एक कॉल या क्लिक की दूरी पर. राजधानी दिल्ली और एनसीआर में इस तथ्य की पुष्टि के लिए हमने http://www.hotnewsdelhiiescorts.com/delhi.html नामक एक वेबसाइट पर क्लिक किया. पलक झपकते दर्जनों एस्कॉर्ट सर्विस एजेंसियों और सैकड़ों मसाज पार्लर के पते, ५६ हजार गर्लस-ब्वॉयज एस्कॉट्र्स की सूची सामने आ गई. दावा था कि इनमें से अधिकतर कालेज गर्ल या ब्वॉयज हैं. हम वेबसाइट से अदिति एस्कॉर्ट का नंबर लेते हैं. फोन एक लड़के ने उठाया. अदिति से बात करनी है, कहने पर जवाब मिला, 'आपको चाहिए क्या' हमने बिना झिझक कहा, अदिति से मिलना है. वह हमारा इशारा समझ चुका था. 'अगर अदिति से मिलना है तो पहले किसी अच्छे होटल में कमरा लो, फिर फोन करो. एक घंटे के ८,००० और फुल नाइट के १५,०००.' बस, फोन कट गया. इतनी आसानी से चंद मिनटों में, सिर्फ एक फोन काल पर कोई कॉलेज गर्ल मिल जाएगी, यह हमारे लिए किसी अजूबे से कम नहीं था. इसके बाद तो हमने कई फोन किए और कई लड़कियों का 'सौदा' किया.
कॉलेज गर्ल आसानी से उपलब्ध हैं, हमें इस बात का अहसास हो गया, पर इसे और करीब से जानने के क्रम में हमने थोड़ी मशक्कत की तो हमारी मुलाकात इस धंधे की एक पुरानी खिलाड़ी से हुई. उसे हमने बड़ी मुश्किल से विश्वास में लिया. हमारी मुलाकात कैलाश कॉलोनी के मेट्रो स्टेशन पर हुई. प्राइस टैग से घिरी वह लड़की बेहद खूबसूरत थी. बातों-बातों में पता लगा कि वह दिल्ली विश्वविद्यालय से २००६ बैच की पास आउट है.

हमने जानना चाहा कि वह कॉलेज से देह- व्यापार में कैसे आ गई? थोड़ी खामोशी के बाद उसने कहा, 'हॉस्टल में तमाम बंदिशें थीं. मौज-मस्ती के चक्कर में हम चार लड़कियां हॉस्टल छोड़कर कमला नगर में किराए के फ्लैट में रहने लगे. रोज देर रात तक घूमना और होटलों में खाना-पीना, मतलब जिंदगी में हर तरह की मौज-मस्ती शुरू हो गई. एक शाम हमारी एक दोस्त ने हमें कनॉट प्लेस के एक महंगे रेस्तरां में पार्टी दी. बाद में मालूम हुआ कि वह सेक्स व्यापार चलाने वाले एक लड़के के संपर्क में है. वही उसे आलीशान होटलों में भेजता है और एक बार सेक्स के लिए उसे पांच हजार रुपये मिलते हैं. पहले तो हमने उसे समझाया कि यह गलत है, लेकिन रोजमर्रा के खर्चों और बदली फैशनेबल जीवन-शैली की बढ़ती डिमांड ने हमारा भी रुख इस बाजार की ओर कर दिया...' उसका गला भर आया था.

थोड़ी देर बाद उसने फिर चुप्पी तोड़ी, '...जब पहली बार मैं नोएडा सेक्टर-१८ के एक होटल में जा रही थी, तो ऐसा लग रहा था कि किसी ने मेरे पैर पर दस-दस किलो का वजन बांध दिया है. खैर, बड़ी हिम्मत के बाद मैं कमरे में गई. कमरे में मेरे साथ क्या हुआ, याद नहीं. हां, इतना जरूर याद है कि होटल से बाहर आते ही मुझे एक लड़के ने १५ हजार रुपये दिए थे. मैंने पूछा कि १५ हजार क्यों? मेरी दोस्त ने तो बताया था कि पांच हजार मिलेंगे तो उस लड़के ने कहा कि तुम पहली बार आई थी इसलिए. आगे से तुम्हें भी पांच हजार ही मिला करेंगे.' कुछ ऐसे ही शुरू हुई थी दिल्ली विश्वविद्यालय की इन चारों लड़कियों की कहानियां. आज बाकी तीन लड़कियां तो शादी करके सामान्य जिंदगी में वापस लौट चुकी हैं, लेकिन यह एक लड़की आज भी जिस्मफरोशी के बाजार की जीनत बनी हुई है और बाजार में ऐसे जीनतों की कोई कमी नहीं.

देह-व्यापार का धंधा रेडलाइट एरिया से निकलकर कॉलेज के हॉस्टल तक पहुंच गया है. महानगरों की चमक-दमक में खोने वाले छात्र-छात्राओं की मौज-मस्ती के लिए धन कमाने का यह एक आसान जरिया बन रहा है. देह-व्यापारी भी नई पीढ़ी के इस दर्शन से अच्छी तरह वाकिफ हैं. लिहाजा अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए वे कॉलेज के लड़के-लड़कियों से संपर्क करते हैं, उन्हें मोटी रकम का लालच देते हैं. इस बाजार में कुछ ही घंटों में बेशुमार पैसे मिलता है और मस्ती अलग से. इसका नशा लड़के-लड़कियों को इस पेशे से निकलने ही नहीं देता.

राजधानी में तमाम मसाज पार्लरों ने भी कॉलेज गर्ल सप्लाई का काम संभाल रखा है. हमने निजी फोन डायरेक्टरी संचालित करने वाली 'जस्ट डायल सर्विस' को फोन कर अपने एक मित्र के घर के पास स्थित कुछ मसाज पार्लर के नंबर मांगे. आधे घंटे के भीतर अलग-अलग मसाज पार्लर से मेरे पास दर्जन भर फोन आ गए. दरअसल वे मसाज पार्लर नहीं, सेक्स की दुकानें थीं. वे धड़ल्ले से हमारी पसंद मसलन, कॉलेज स्टूडेंट, रशियन या अफगानी गर्ल, वर्किंग या फिर हाउस वाइफ चाहिए... पूछते हैं. जस्ट डायल सर्विस के माध्यम से हमें करीब १० फोन आए और उनमें से आठ ने हमारे सामने कुछ ऐसी ही पेशकश रखी. हमने कॉलेज गर्ल की मांग की तो उन्होंने फोन पर ही सौदा तय कर लड़की को बताई जगह पर पहुंचाने का भरोसा दिला दिया. इनका मीटर घंटे के हिसाब से चलता है. एक मसाज पार्लर के दलाल ने हमसे कहा, 'आपको हम एक घंटे की मसाज व बाथ के साथ पूरे एक घंटे इंटरकोर्स की सुविधा देते हैं और इसके लिए आपको देने होंगे मात्र २,५०० रुपये. अगर आप पूरी रात बिताना चाहते हैं तो आपको ४,००० रुपये खर्च करने पड़ेंगे.'  रेट लड़की-लड़के की उम्र, फिगर और इलाके पर निर्भर करता है. दक्षिण दिल्ली के पॉश इलाकों में रेट १० हजार रुपये तक जाता है. कभी राजधानी में सेक्स खरीदने के लिए एक ही मंडी थी, जीबी रोड. ग्राहक कोठा ढूंढते हुए वहां पहुंचते थे, पर अब सेक्स के जरिए पैसा कमाने वाले लोगों का एक ऐसा बड़ा तबका मौजूद है, जो अपना ग्राहक खुद ढूंढता है. कॉलेज में पढऩे वाले छात्र-छात्राओं के अलावा इसमें, कामकाजी और घरेलू महिलाएं भी शामिल हैं. यहां की सामान्य सेक्स दरें इस तरह हैं- सिंगल शॉट के २,०००, वन शॉट विद फोर-प्ले ३,००० और फुल नाइट के १०,००० रुपये. जीबी रोड के सेक्स व्यापारियों का कहना है कि दिल्ली में कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने उनके धंधे का भट्टा बैठा दिया है. इस स्टोरी के लिए महीने भर से ज्यादा भटकने के बाद हम इसी नतीजे पर पहुंचे थे कि वे गलत नहीं कह रहे थे.
 

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अंक तिथि: अगस्त 1, 2013

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