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सोमवार, अप्रैल 21, 2014
 
 

चेखव का पत्र लीडिया के नाम

 

Issue Dated: सितंबर 18, 2011, नई दिल्‍ली
 

रूस में लघुकथाओं के जनक माने जाने वाले महान लेखक एंटन चेखव को  उनकी कहानियों के अलावा, उनके शानदार नाटकों के लिए भी जाना जाता है. विश्व साहित्य के सुपरिचित नाम चेखव का लीडिया से अंतरंग प्रेम सर्वज्ञात है. लीडिया एक संवेदनशील स्त्री थीं, लेखन में उनकी रुचि थी. लीडिया ने 'चेखव इन माइ लाइफ' नाम से एक किताब भी लिखी जिसमें लीडिया को लिखे चेखव के तमाम पत्र शामिल हैं. उन पत्रों को डिविड मागरशैक ने अंग्रेजी में अनुवाद किया और उस पर एकालाप की शैली में जो नाट्य रूपांतरण किया गया वह बेहद मकबूल रहा.


27 मार्च, 1894, याल्टा

मेरी प्यारी लीडिया,


मधुर लीका, पत्र के लिए धन्यवाद.  हालांकि तुम यह कहकर मुझे डराना चाहती हो कि तुम जल्दी ही मर जाओगी, और मुझे ताना मारती हो कि मैं तुम्हें छोड़ दूंगा, फिर भी तुम्हें धन्यवाद. मैं अच्छी तरह जानता हूं कि तुम मरोगी नहीं और कोई तुम्हें छोड़ेगा नहीं. मैं याल्टा में हूं और खूब मजे कर रहा हूं.

स्थानीय सामंतशाही अथवा तुम उसे कुछ भी नाम दे दो, खूब खिलवा रही है और मैं यहां रिहर्सलों की देख-रेख कर मजे कर रहा हूं. मनोरम, काले, लाल, पीले, भूरे सिरों के फूलों के गुच्छों को लगातार देखते रहने में, और उनका गाना सुनने में बड़ा मजा आता है. यहां मैं खूब खाता हूं. मोटे मेमने का भुना हुआ गोश्त, प्याज की टिकिया, मटन-चाप और यह सब मैं यहां लड़कियों के स्कूल की संचालिका के साथ बैठ कर खाता हूं. मैं यहां के बड़े लोगों के घरों में जाकर पीता हूं. पेस्ट्री की दुकान और अपने होटल पर मैं अलग खाता ही हूं.

मैं दस बजे सोता हूं, दस बजे उठता हूं, और दोपहर के भोजन के बाद भी आराम करता हूं, पर लीका, फिर भी मैं उकता रहा हूं. मैं इसलिए नहीं उकता रहा हूं, क्योंकि मेरी 'स्त्रियां' मेरे पास नहीं हैं, बल्कि इसलिए कि यहां बसंत बहुत शानदार होता है और दूसरा कारण यह कि मुझे कुछ लिखना चाहिए, यह ख्याल एक पल के लिए भी मेरा साथ नहीं छोड़ता. मुझे कुछ लिखना चाहिए...लिखना चाहिए...लिखना चाहिए...

मेरा विचार है कि सुस्ती के बिना असली खुशी असंभव है. मेरा आदर्श यह है कि पूरी तरह बेकार रहा जाए और एक मोटी जवान लड़की से प्यार किया जाए. मेरे लिए सबसे अधिक मजे की और पसंदीदा बात यह है कि बेकार घूमा जाए या बिना किसी काम के बैठे रहा जाए. मेरा प्रिय शौक है बेकार की चीजें (पत्ते, घास आदि) इकट्ठे करना और बेकार का काम करना. पर मैं एक साहित्यकार भी तो हूं और मुझे यहां याल्टा में भी कुछ न कुछ जरूर लिखना चाहिए...

प्यारी लीका! जब तुम एक बड़ी गायिका बन जाओ और तुम्हें खूब पैसे मिलने लगें तो तुम दयावान बनकर मुझसे शादी कर लेना और मुझे सहारा देना, जिससे बिना काम किए जी सकना मेरे लिए संभव हो सके और यदि तुम सचमुच ही मरने वाली हो तो यह काम बारबरा एबर्ले को सौंप जाना, जिसको तुम जानती ही हो कि मैं प्यार करता हूं. जिम्मेदारियों की और उन कामों की, जिनसे मैं छुटकारा नहीं पा सकता, निरंतर चिंता ने मुझे इस स्थिति में ला खड़ा किया है. महज इसी बात को लेकर मैं पिछले एक सप्ताह से पीड़ा महसूस कर रहा हूं.

तुम्हारा चेखव 

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अंक तिथि: अगस्त 1, 2013

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