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सोमवार, दिसंबर 22, 2014
 
 

माटी-बेटी के रिश्ता

 

Issue Dated: अप्रैल 1, 2012
 

माटी-बेटी के रिश्ता

द संडे इंडियन के जरिए त्रिनिदाद अउर टोबैगो के प्रधानमंत्री कमला प्रसाद बिसेसर के आपन पुरखन के गांव बिहार भेलूपुर गांव आवे के जानकारी मिलल. एतना जादा जानकारी तऽ एहिजा के अखबारो में ना छपल रहे. आपन गांव छोड़ के भागल एगो लइका के जब अंगरेज गिरमिटिया मजूर बना के हजारो मील दूर भेज देलस अउर ओकरा परिवार के कई पीढ़ी तक कवनो जानकारी ना मिल पावल. केतना दरद भरल जिनगी के ऊ क्षण बा जेकरा में माई-बाबू से अलगा भइला पऽ मने-मन रोअत-सिसकत ऊ ओह देश में पहुंच गइल जहवां से ऊ कवनो संदेश भेज पावे में असमर्थ रहे. कमला पुरखन के गांव जाके रोवे लगली जइसे बेटी ससुरा से नइहर आइल होखे. हजारो दर्शकन के आंख में लोर रहे. नेह, छोह-बिछोह सब संगही उमड़त रहे. कमला प्रसाद बिसेसर के बात करत-करत रूमाल से आंख के लोर पोछत देख के लागल कि आपन माटी-बेटी के रिश्ता कबहूं भुलाइल नइखे जा सकत. 
राधेश्याम केसरी 
देवरिया, गाजीपुर, उत्तर प्रदेश
 
व्यवस्था पऽ चोट बा 
'तबाही के मंजर' में दिल दहला देवे वाला कवर स्टोरी पढ़ के लागल कि द संडे इंडियन अबहियों अइसन समाजिक मुद्दा उठा रहल बा, जेकरा सरकार अउर जनप्रतिनिधि नजरंदाज कऽ रहल बाड़े. बात असम में रोंगटा खड़ा कऽ देवे वाला ऑल असम स्टूडेंट यूनियन, बंगाली अउर मुस्लिम समुदाय के होखे चाहे इंदिरा गांधी के हत्या से उपजल कांग्रेसियन अउर सिखन के बीच के दंगा के, भागलपुर में भइल सांप्रदायिक दंगा के बात कइल जाव चाहे बाबरी विध्वंस भइला से भइल सांप्रदायिक हिंसा के, ई पत्रिका बहुते खूबसूरती से आपन बात रख के व्यवस्था पऽ चोट कइले बिया. बात चाहे मेरठ, मुंबई, आंध्र, केरल, गुजरात, कावेरी दंगा के होखे चाहे सिख विरोधी दंगा पीडि़तन के, आजुओ ई लोग इंसाफ खातिर भटक रहल बाड़े, ई सच्चाई जानत तऽ सभे बा, बाकिर केहू आगे नइखे आवत. अइसन में एह पत्रिका के कदम सराहनीय बा.  गौरव कुमार
सासाराम, बिहार
 
सरकार उठावे कठोर कदम
नकली नोट के कारोबार एतना जादा हद तक बढ़ गइल बा, एकर जानकारी हमरा द संडे इंडियन के मार्च के अंक के पढ़ के लागल. केतना शर्मनाक बात बा कि बड़-बड़ नेता आ अफसर एह बात के जानत तऽ बाड़े बाकिर एकरा खातिर कवनो अइसन ठोस कदम नइखन उठावत जेकरा से एकरा पऽ पूर्ण रूप से रोक लाग सके. भारत के विकसित देश बने के सपना कइसे साकार होई जब दुश्मन देश हमनी के अर्थव्यवस्था के चौपट करत रहिहें. आपन देश में जाली नोट छापल जाता तऽ हमनी के सरकार के सूचना तंत्र कमजोर बा, जेकरा मजबूत करे के जरूरत बा. अगर बाहर के देश से आवऽता तऽ एकर मतलब कि हमनिए के देश के कुछ अकर्मठ अउर अनिष्ठïावान अधिकारी अउर कर्मचारी एह षड्यंत्र में शामिल बाड़े. जेकर पहचान कऽ के सरकार के चाहीं कि अइसन दंड देवे के प्रावधान करे कि केहू अइसन कारोबार करे के जुर्रत ना कऽ सके. 
अनुपमा कुमारी 
पटना, बिहार  
 
 
नकली नोट के कारोबार- रोके सरकार
द संडे इंडियन के मार्च के अंक में प्रकाशित विशेष खबर 'जालसाज-जाल-जंजाल' पढ़ के लागल कि काहें देश में नकली नोट के कारोबार बढ़ते जा रहल बा. जबकि देश के सरकार के पता बा कि ई नकली नोट पाकिस्तान से तस्करी कऽ के भारत के विभिन्न राज्यन में पहुंचावल जाला, तबो तस्करी जारी बा. नकली नोट के तस्करी के पाछे दूगो बाते हो सकेले. पहिला ई कि नकली नोट के तस्करी के रोकल सरकार के बस के बात नइखे (शायद हमरा सुरक्षा तंत्र के खामियन के चलते सरकार तस्करी के ना रोक पा रहल होखे) अउर सरकार सिर्फ ई बता के ही देश के आवाम के चौकन्ना कऽ रहल बिया कि बाजार में दौड़ रहल मुद्रा में .75 फीसदी नकली नोट बा. दोसर बात ई हो सकेले कि, देश में नकली नोट के तस्करी अउर ओकरा भारतीय बाजार में दौड़ावे के पाछे सरकार के कुछ बड़ राजनेता अउर अधिकारियन के मिलीभगत होखे. हालांकि हमरा पहिली वाली बात सही होखे के संकेत जादा लागेला. पाकिस्तान के आईएसआई चाहत बिया चाहे सीधा कहीं तऽ पाकिस्तान चाहत बा  कि समय-समय पऽ भारत के अर्थव्यवस्था पऽ चोट कइल जाव अउर भारत के आर्थिक स्थिति कमजोर हो जाव. सरकार के एह तस्करी के रोके खातिर कड़ा से कड़ा कदम उठावे के जरूरत बा.
सुमन कुनाल
अंबाला कैंट
 
 
माया के अजब माया
द संडे इंडियन के मार्च के अंक में छपल रिपोर्ट 'बढ़त जोश, घटत वोट' के पढ़ के बसपा सुप्रीमो आ मुख्यमंत्री मायावती उर्फ बहन जी के संबंध में ई कहल जा सकेला कि त्रेताजुग में भगवान राम  अहिल्या अउर शबरी के उद्धार कइले आ कलियुग में काशीराम मायावती के. बसपा के संस्थापक स्व. कांशीराम के भाई दलबारा सिंह सही कहले बाड़े कि 'मायावती जी कांशीराम के मिशन के कमीशन में बदल दिहले बाड़ी. कांशीराम के कहनाम रहे कि 'एक वोट एक नोट बाकिर मायावती ओकरा बदल के कऽ दिहली 'एक टिकट एक करोड़. अब तक मायावती के सफलता मिलत रहल अउर ऊ तीन बेर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी बन गइली. मायावती के नीति अउर नारा हमेशा बदलत रहेला. मायावती सबसे पहिले 'तिलक, तराजू और तलवार, इनके मारो जूते चार के नारा देके अनूसूचित जाति वोट बैंक के बसपा के झोली में डाल लिहली. ओकरा बाद नारा बदलल अउर सपा के जड़ से उखाड़ फेंके खातिर नारा दीहल गइल 'चढ़ गुंडों की छाती पर, बटन दबाओ हाथी पर अउर एह बेर विधानसभा चुनाव में जनसभा के दौरान नारा देत रहली कि 'चढ़ विपक्ष की छाती पर बटन दबाओं हाथी पर'. 
निमित जायसवाल
मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश
 
सपा बनल माया के विकल्प
दलित वर्ग के पास पहिले विकल्प ना रहे बाकिर आज मायावती के कामकाज से नराज दलित वर्ग के पास भाजपा, सपा समेत कइगो अउरो पार्टी  विकल्प के रूप में बाड़ी स. विधान सभा चुनाव के दौरान मायावती जवना जिला में भी जनसभा के संबोधित करे गइली, ओहिजा इहे कहली कि हम दलित के बेटी हईं, रउआ हमरा वोट देइब तब हम मुख्यमंत्री बनब. सोशल इंजीनियरिंग के तहत बसपा प्रदेश के जनता के बेवकूफ बनावे के काम कइलस. मायावती के अब तक के राजनैतिक सफलता के पाछे जातिगत विषय काफी अहम रहल बा. उत्तर प्रदेश के 2007 के विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी सबसे जादा सीट हासिल कइलस बाकिर दू बरिस बाद 2009 में  भइल लोकसभा चुनाव में बसपा के उत्तर प्रदेश में 80 में से खाली 20 सीट मिल पावे के का कारण रहे, जबकि ई लोकसभा चुनाव बहन जी प्रधानमंत्री बने के सपना देखत लड़ल रहली. सिर्फ सपा के आतंक से मुक्ति पावे खातिर 2007 में प्रदेश के जनता बसपा के आपन समर्थन देले रहे बाकिर उनकर चालढ़ाल देख के लोकसभा चुनाव में उनका ऊ समर्थन ना मिलल आ एह बेर जनता के निर्णय चउंकावे वाला रहल. सांच कहीं तऽ सपा दलितन खातिर भी माया के विकल्प बिया.
अनिता 
नई दिल्ली
 
युवा सम्हरिहें राजनीति 
द संडे इंडियन के 'बदलिहें हिंदुस्तान-गंउआ के जवान' कभर स्टोरी वाला मार्च, 2012 के प्रेरणा देवे वाला अंक पढ़े के मिलल. एह अंक में जवन सामग्री दीहल गइल रहे ओकरा खातिर हम प्रधान संपादक अरिंदम चौधरी आ पूरा संपादकीय टीम के बहुते आभारी बानी. हम द संडे इंडियन के नियमित पाठक इर्हं आ एक्के बइठकी में पूरा पत्रिका पढ़ला से अपना के रोक ना पावेनी. रउआ अपना संपादकीय में भारतीय व्यापारियन के समस्या के बारे में कस्टम विभाग में फइलल  भ्रष्टाचार के ओर आम जन-मानस के धेयान आकर्षित कइले बानी, जवना खातिर रउआ हार्दिक बधाई के पात्र बानी. हम उमेद करत बानी कि आगे आवे वाला समय में भी एही तरे के समस्या सब के ओर भारत सरकार के धेयान जरूर जाई अउर एह समस्या से राहत देवे के कवनो ना कवनो कोशिशो कइल जाई. एकरासाथे रउआ भारत के भ्रष्टाचार मुक्त शासन व्यवस्था अउर जनसरोकार के तरजीह देवे वाली साफ-सुथरा राजनीति के बीड़ा उठावे वाला कुछ जुनूनी नौजवानन के कहानियो प्रकाशित कइले बानी. हमार मानल बा कि एकरा से ना खाली भारतीय जन मानस के अपना प्रत्याशियन के चुने में आसानी होई बलुक देश के नौजवानन के देश हित में काम करे के प्रेरणो मिली.
डॉ. जगदीश गांधी
लखनऊ, उत्तर प्रदेश
 
सब्सिडी खतम कऽ देवे के चाहीं
द संडे इंडियन के मंथन कॉलम में छपल प्रसून एस. मजुमदार जी के आलेख 'भ्रष्टाचार बढ़ावत बिया सब्सिडी' पढ़ के लागल कि देश में दीहल जाये वाली हर तरे के सब्सिडी के खत्म कऽ देवे के चाहीं काहेंंकि जेकरा खातिरसब्सिडी बा, जब ओकर लाभ उनका तक पहुंची ना पा रहल तऽ एकरा बंद कऽ दीहल ही उचित बा. प्रसून एस. मजुमदारजी बिल्कुल ठीक कहले बानी कि राजनीतिक दल रणनीति के तहत सब्सिडी शब्द के लाभ उठा के खाली लोगन के भरमावात बाड़े. मजुमदारजी जइसने हमहूं मानेनी कि सब्सिडी देवे के इरादा बहुत नेक बा बाकिर अगर हकीकत देखीं तऽ इहे पता चली कि ई भारतीय अर्थव्यवस्था के गर्त में ले जा रहल बा. देश के सब्सिडी बिल हर साल एक लाख करोड़ के आंकड़ा पार कऽ जाला. देश में डीजल पऽ सब्सिडी देवे पऽ हर साल पचास हजार करोड़ रुपया के खर्च आ रहल बा बाकिर रउआ एगो बात सोचीं कि का रउआ कवनो गरीब के डीजल कार चलावत देखले बानी? एगो अउर अहम बात ई कि देश में हर साल एलपीजी सिलेंडर पऽ बीस हजार करोड़ रुपया के सब्सिडी दीहल जा रहल बा बाकिर का गरीबी रेखा से नीचे के कवनो आदमी कबहीं सिलेंडर के इस्तेमाल करेला. विश्वास ना होला बाकिर आंकड़ा झूठ ना बोलेला! 
सौरभ सुमन
सीवान, बिहार
 
 
दंगा के सांच इहे बा
द संडे इंडियन के मार्च के अंक में छपल कभर स्टोरी 'दरद दंगा के' पढ़ के बहुते अचरज भइल. सांच में द संडे इंडियन में प्रकाशित सगरो लेख आ समाचार आम जन-मानस के देश में फ इलल समस्या सब के जाने के साथे ओह समस्या सब के समाधान खातिर उठावल जाये वाला कदम के ओर भी स्पष्ट मार्गदर्शन देला. एह पत्रिका में तरे-तरे के विषय पऽ तरे-तरे के विश्लेषण अउर विचार व सुझाव पढ़े के मिलेला. एह बेर दंगा के बारे में जानकारी देत इतिहास में बीतल बात के दोहरावे के साथे इहो बतावे के कोशिश कइले बानी कि कवनो लड़ाई चाहे दंगा कइला से केहूं के भला ना होला अगर होला तऽ सिर्फ नोकसान. पत्रिका में छपल सगरो लेख खातिर उनका लेखकन के साथे-साथे पत्रिका के संपादक मंडल के सब सदस्य हार्दिक बधाई के पात्र बाडऩ. हमरा उमेद बा कि ई दौर अइसहीं आगे भी चलत रही. 
विशाल भारद्वाज
नैनीताल, उत्तराखंड
 
 
का जज्बा रहे शहीदन में 
द संडे इंडियन  के 4 मार्च के अंक में इतिहास बोलेला कालम में छपल 'भगत सिंह, राजगुरु, अउर सुखदेव के पाती गर्वनर के नामे' पढ़ली,  जवन बहुते रोचक अउर जानकारी से भरल लागल. अइसन पुरान पाती कवनो अउर पत्र-पत्रिका में ना छपेले, सिर्फ द संडे इंडियन में ही ई पढ़े के मिलेला. कवन दौर रहल होई जब एगो इंसान घर-बार छोड़ के देशभक्ति के नशा में चूर होके देश खातिर बलिदान देवे खातिर तइयार हो जात रहले. देश खातिर फांसी चढ़ के जवन 
जज्बा ई तीनो शहीद देखवले ओकरा बारे में कुछ भी कहल ओह जज्बा के तौहीन कइल होई काहेंकि ना तऽ हमनी आज ओह तरे के जज्बा देखा सकेनी चाहे सांच कहीं तऽ हमनी में से केहूं में ओह तरे के जज्बे नइखे, देश खातिर बलिदान होखे के बाते  छोड़ दीं. 
एन. के. तिवारी
छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश
 
 
केहू तऽ खबर लेस यमुना के 
द संडे इंडियन पत्रिका में 'खबर खंगार के' कॉलम  छपल खबर 'यमुना के सफाई कइसे बनी सच्चाई' पढ़ के लागल कि केहू के तऽ यमुना के खबर लेवे  के चाहीं. यमुना आज दिल्ली के 70 फीसदी से जादा पानी के जरूरत के पूरा कऽ रहल बाड़ी. सरकार के यमुना के सफाई खातिर ठोस कदम उठावे के चाहीं. एह मामला में खाली सरकार नइखे बलुक एनजीओ अउर आम जनता के साथे मिलके काम करे अउर सरकार के जगावे के जरूरत बा. तनी सोचीं कि यमुना में केतना फैक्ट्री, कारखाना अउर औद्योगिक क्षेत्र के गंदगी जाके गिरेले अउर हम ओही यमुना के पानी पीयेनी. हालांकि पिछला कुछ समय में कइगो समाजिक संस्था अउर कइगो बड़ संत यमुना के सफाई के मुद्दा के लेके एकरा से जुड़ल बाड़े. अगर वाकई सरकार यमुना के सफाई चाहत बिया तऽ ओकरा एगो सफाई अभियान चलावे के 
पड़ी अउर ओकरा खातिर एगो स्वतंत्र निकाय के जरूरत होई. 
विनीत त्यागी 
जिंद, हरियाणा
 
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तारीख: अप्रैल 18, 0000

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