भारत अबहीं तक एह मृदु शक्ति के बुद्घिमतापूर्वक इस्तेमाल ना कइले बा.कुछ दिन पहिले हम कराटे किड नाम के फिलिम देखले रही. बेशक ऊ एगो बहुत बढिय़ा फिलिम बिया. हालांकि हमरा जवन चीज पसंद आइल ऊ ओकर कहानी चाहे शूटिंग के तरीका ना बलुक ऊ जगह रहे जहवां शूटिंग कइल गइल. फिलिम में बड़ सहजता से चीनी संस्कृति अउर आकर्षक सुन्दता के मन के भावेवाला अंदाज में देखावल गइल बा.
कुछ सप्ताह पहिले टीवी देखल शीत युद्घ के दौरान चैनल वन देखे जइसन रहे. देखे लायक सब चैनल रूसी सरलता के कवनो पहलू के देखावत रहले. मिसाल के तौर पऽ हिस्ट्री चैनल के ही ले लीहीं. ओकरा पऽ डेडलिएस्ट वॉरियर नाम के एगो शृंखला देखावल जात रहे, जेकरा में अलग-अलग संस्कृतियन अउर सयता के योद्घन के एक-दोसरा से भिड़ावल जात रहे. ऊ सांयिकीय आंकडऩ के विश्लेषण से हथियार, सामरिक चलन, शारीरिक कौशल आ बल के तुलना करत रहले. एकरा बाद कंप्यूटर से बनावल योद्घन के एगो अइसन अंतिम युद्घ में एक-दोसरा से भिड़ा दीहल जाला, जेकरा में विजेता के निर्णय होला. स्पार्टन बनाम निंजा, शाओलिन भिक्षु बनाम माओरी योद्घा आदि-आदि... रउआ समझिए रहल होखब.
भारत के लाखों नागरिकन के रहे खातिर घर के जरूरत के पूरा होखल अबो एगो अधूरा सपना बा. सुख-सुविधा से भरल मकान आ नीमन जीवन शैली के पृष्ठभूमि के बादो दुर्भाग्य से अब ले भारत में 85-90 मिलियन लोग अइसन बाड़े, जिनका पास घर जइसन कहे लायक कुछो नइखे. ग्यारहवां पंचवर्षीय योजना के वर्किंग कमिटी के रिपोर्ट के मोताबिक भारत आवास के लगभग 140 लाख इकाई के कमी से जूझ रहल बा. एगो राष्ट्र के तौर प हमनी आपन आबादी के आधा हिस्सा के भी रहे खातिर घर के नीमन सुविधा ना दे पा रहल बानी. ई तरह से हमनी लाखों लोगन से सही ढंग से विकास कइला अउर नीमन माहौल में रहे के मौका छीन लेले बानी.
एक बेर फेर नया साल आ गइल अउर एह नया साल के शुरुआत हमरा एगो चमत्कार के साथ साक्षात्कार से करे दीहीं. हमनी के सब आपन जिनगी में एगो चाहे ओकरा से ढेर चमत्कार से काम चला सकेनी जा, अउर एगो अइसन चमत्कार जे मानव इच्छा से बनल होखे, जे चमत्कार के इंतजार करे वाला कइगो जिनगियन के बदल सके, ओकरा साथे नया साल के जश्न मनावल तऽ जरूरिए बा. बी·केएस अयंकगर 14 दिसंबर के 93 बरिस के हो गइले. ई ओह दिन के कहानी हऽ जब हम ओह आदमी अउर उनकर चमत्कारन से मिलल रहीं...
भारत के धोनी के नेतृत्व के आभारी होखे के चाहीं. फाइनल में उनकर शानदार प्रदर्शन उनका के सफल नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित क दीहलस.
ई एगो अजीब तस्वीर रहे. ना ही बहुत भयानक, ना जादा व्यग्र करे वाली. पांच कहीं त ई हमरा वान गाग के एगो पेंटिंग के इयाद दिला देलस. तस्वीर में साफ तौर प जवन कुछ लउकत रहे ओकरा में भावुक अंतर्धारा के अइसन जबरदस्त प्रवाह रहे कि हमरा अनायासे 'पोटैटो ईटर' के इयाद आ गइल.
दोपहर के बाद लिखल जरूर शुरू क देवे के चाहत रहे, बाकिर पिछला तीन घंटा हम अपना एगो पुरान प्यार के साथे बिता दिहनीं. ई सब करत-धरत काफी देर हो गइल.